एक डरावना वीडियो सोशल मीडिया पर तैर रहा है। आसमान में एक छोटी फ्लाइट उड़ रही है। अचानक एक पैराग्लाइडर उसके रास्ते में आ जाता है। टक्कर होती है। सेकंड के सौवें हिस्से में पैराशूट के चीथड़े उड़ जाते हैं। पैराग्लाइडर हवा में तेजी से गोल-गोल घूमते हुए सीधे जमीन की तरफ गिरने लगता है। वीडियो देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। लोग सोशल मीडिया पर इसे शेयर कर रहे हैं, हैरान हो रहे हैं। लेकिन यह सिर्फ एक वायरल क्लिप नहीं है। यह एविएशन सेफ्टी और आसमान में बढ़ते ट्रैफिक की एक गंभीर चेतावनी है।
जब आप इस तरह का कोई एक्सीडेंट देखते हैं, तो दिमाग में पहला सवाल आता है कि क्या वह शख्स बचा? सच यह है कि ऐसे हादसों में बचने की गुंजाइश न के बराबर होती है। हवा में जब दो अलग-अलग रफ्तार और आकार की चीजें टकराती हैं, तो नुकसान भयानक होता है। चलिए इस पूरे मामले को गहराई से समझते हैं कि आखिर आसमान में ऐसे हादसे क्यों होते हैं और इनसे कैसे बचा जा सकता है।
आसमान का ट्रैफिक और पैराग्लाइडिंग का बढ़ता क्रेज
एडवेंचर स्पोर्ट्स का शौक हाल के सालों में बहुत तेजी से बढ़ा है। पैराग्लाइडिंग अब सिर्फ कुछ खास पहाड़ी इलाकों तक सीमित नहीं रही। मैदानी इलाकों में भी मोटो-पैराग्लाइडिंग का चलन बढ़ा है। लोग पीठ पर भारी मोटर और पंखा बांधकर हवा में उड़ जाते हैं। दिक्कत तब शुरू होती है जब ये पैराग्लाइडर्स बिना किसी एयर ट्रैफिक कंट्रोल की जानकारी के उस हवाई क्षेत्र में घुस जाते हैं जहां छोटे विमान या हेलिकॉप्टर उड़ रहे होते हैं।
हवाई जहाजों के लिए बकायदा रूट तय होते हैं। उनके पास रडार सिस्टम होता है। वे एक-दूसरे से संपर्क में रहते हैं। फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन जैसी वैश्विक संस्थाएं और स्थानीय नागरिक उड्डयन महानिदेशालय इसके लिए कड़े नियम बनाते हैं। लेकिन एक साधारण पैराग्लाइडर के पास कोई रडार नहीं होता। उसके पास न तो कोई ट्रांसपोंडर होता है जिससे वह बड़े विमानों के रडार पर दिखाई दे सके। वह पूरी तरह अपनी आंखों और किस्मत पर निर्भर होता है।
जब हवा में टकराते हैं दो अलग माध्यम
इस वायरल वीडियो को ध्यान से देखें। विमान अपनी तय गति से आगे बढ़ रहा था। पायलट की विजिबिलिटी में पैराग्लाइडर शायद बहुत देर से आया। छोटे विमानों की रफ्तार भी कम से कम 150 से 200 किलोमीटर प्रति घंटा होती है। इस रफ्तार पर अचानक सामने आई किसी चीज को देखकर रास्ता बदलना नामुमकिन होता है।
टक्कर होते ही जो हुआ वह भौतिकी का सीधा नियम है। विमान का प्रोपेलर या उसका विंग जब पैराशूट के कपड़े से टकराया, तो कपड़े के तुरंत परखच्चे उड़ गए। पैराशूट का पूरा सिस्टम हवा के दबाव और उसके आकार पर टिका होता है। जैसे ही उसका आकार बिगड़ा, वह एक अनियंत्रित मलबे की तरह नीचे गिरने लगा। विमान को भी ऐसे हादसों में भारी नुकसान होता है। विंग डैमेज होने या प्रोपेलर टूटने से विमान भी क्रैश हो सकता है।
गलतियां जो जान पर भारी पड़ती हैं
हवाई सुरक्षा के जानकारों का मानना है कि ऐसे ज्यादातर हादसों के पीछे तीन मुख्य कारण होते हैं। पहली गलती है अनियंत्रित हवाई क्षेत्र का गलत इस्तेमाल। कई पैराग्लाइडर पायलट जोश में आकर उन जगहों पर चले जाते हैं जो छोटे विमानों के टेकऑफ या लैंडिंग के रूट में आते हैं।
- विजिबिलिटी की कमी: बादलों या धुंध के कारण पायलट एक-दूसरे को देख नहीं पाते।
- कम्युनिकेशन गैप: पैराग्लाइडर के पास एयर ट्रैफिक कंट्रोल से बात करने का कोई जरिया नहीं होता।
- नियमों की अनदेखी: बिना लोकल अथॉरिटी की परमिशन के उड़ान भरना।
कई बार लोग शौकिया तौर पर बिना पूरी ट्रेनिंग के उड़ने लगते हैं। उन्हें विंड डायरेक्शन, एयर प्रेशर और एयरस्पेस क्लासिफिकेशन की समझ नहीं होती। नतीजा यह होता है कि वे अनजाने में मौत के जाल में फंस जाते हैं।
सुरक्षा के लिए अब क्या करना होगा
अगर आप एडवेंचर स्पोर्ट्स के शौकीन हैं या इस फील्ड में कदम रखना चाहते हैं, तो कुछ बातें गांठ बांध लीजिए। हवा में रोमांच तब तक ही अच्छा है जब तक आप सुरक्षित हैं।
सबसे पहले, कभी भी बिना सर्टिफाइड ट्रेनर और लाइसेंस के पैराग्लाइडिंग न करें। जिस इलाके में आप उड़ रहे हैं, वहां के हवाई नक्शे की जानकारी रखें। सरकार को भी अब मोटो-पैराग्लाइडर्स के लिए हल्के ट्रांसपोंडर या जीपीएस ट्रैकिंग डिवाइस अनिवार्य कर देने चाहिए ताकि छोटे विमानों को उनकी लोकेशन का पहले से अंदाजा मिल सके। अपनी जान को जोखिम में डालकर बनाया गया कोई भी वीडियो या रील आपकी आखिरी रील साबित हो सकती है। सुरक्षा नियमों का पालन करें और आसमान को सबके लिए सुरक्षित बनाएं।